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Hymn No. 1361 | Date: 29-Oct-1999
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बहुत जी लिया बनके हिंदू – मुसलमान, अब बन जाने दे प्यार तेरा ।
बहुत जी लिया बनके हिंदू – मुसलमान, अब बन जाने दे प्यार तेरा ।
बहुत खेला–खेल मरने, मारके जीनेका, अब बन जाने दे प्रभु दास तेरा।
गया कई - कई बार दोजख – जन्नत में, हर बार ऊबके ढूँढ़ने आया धरा पे तुझको।
क्या न किया होगा ऐसा कौन सा रूप धरा ना होगा, टिक न पाया तेरे बिना कहीं।
अब कुछ की ना पड़ी है जीवन मौत से जुड़ी है, इस बार जुड़ जाने दे बस तुझसे।
कंपकपा दूंगा दिशाओं और काल को, तेरे प्यार पाके बन जाऊँगा जो अकाल में।
होता रहे खेल गम और खुशी का, मेरे दिल में होगा जो तू, तो है सब कुछ।
हँसी समझ या पागलपन पर मुझपे है सवार प्यार का जुनून, जो मानेगा ना तेरे बिना
जल-थल हो या नभ छुप न पायेगा तू कहीं, खींच लाऊँगा अपने प्यार के जोर से।
गुरूर कह ले या प्यार का सुरूर, जो है तेरे सामने, तेरे बिना ना है मानने वाले।


- डॉ.संतोष सिंह