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Hymn No. 1362 | Date: 29-Oct-1999
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हम भ्रमितों को ना भरमाया करो, प्रभु तुम रूप बदल-बदलके न आया करो।
हम भ्रमितों को ना भरमाया करो, प्रभु तुम रूप बदल-बदलके न आया करो।
मान्यताओं की छुट्टी पिलायी गयी है जनम से, अचानक टूटे सब तो कैसे स्वीकारेगा मन।
मैंना कहता हूँ तुम ढोओं परंपराओं को, पर तेरे ज्ञान को ढाल के प्रेम बूँद में पीला दे हमें।
सनम हमने तो ना सोचा था ख्वाबों में, कि पहुँचेंगे पास तेरे किसी जनम में।
आने के बाद बिछुड़ेगे तो अखरेगा हमें, यूँ ही स्वीकार कर ले तू हमको।
दया की भीख ना माँगता हूँ, बरसाना है तो बरसा दे कृपा की बरसात हमपे ।
कमजोर मन को जो मिलेगा आशीर्वाद तेरा, सबल बनके जीत लेगा दिल तेरा।
इक् बार उठके चलने की है बात, कसम से फिर ना देखेगे मुड़के पीछे की ओर।
जो अदा किया पिछले जनमों में हमने, पूरा कर दिखायेंगे इस बार तेरे सहारे।
दोष ना था तेरा, लगाया था दोषों को गले से हमने, आज उतार फेंकेगे इस केंचुल को।


- डॉ.संतोष सिंह