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Hymn No. 1363 | Date: 30-Oct-1999
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सूनी-सूनी सी थी जिंदगी, कमल के समान खिल गया मिलते ही तुझसे।
सूनी-सूनी सी थी जिंदगी, कमल के समान खिल गया मिलते ही तुझसे।
दरबदर की ठोकरें खाते हुये भटका करते थे, तेरा प्यार पाके सँवर गया।
बंधक थे हम अपनी बासनाओं के, निगाह मिलते ही तुझसे, आजाद हो गया।
गुम हो चुका था गमों के साये में, आनंद का ज्वार उमड़ पड़ा आशीष से तेरे।
लटकती थी तलवार भय की मन पे, तेरा हाथ-हाथों में आते ही बेधड़क हो गया।
सोचा न था कि होगी खत्म दूरी, जीवन में प्यार हो गया जो जरूरी।
मारा – मारा फिरता था अकेले-अकेले, मिलते ही साथ खत्म हो गयी तलाश।
कामनाओं के पास में जकढ़ा था, टूट टूटके बिखर गया जो नजर पड़ी तेरी।
सचमुच जो ना सोचा था, किताबों में पढी हुयी बात घटने लगी जीवन में।
मतलब कुछ का कुछ ना रह गया, जो मन के परे हो गये हम।
- डॉ.संतोष सिंह
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