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Hymn No. 1367 | Date: 02-Nov-1999
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भज लेने दे इस मन को तेरा नाम जो उपजे दिल से।
भज लेने दे इस मन को तेरा नाम जो उपजे दिल से।
कण कण को करता फिरूँ प्रणाम जो दर्शाये तेरे रूप को।
ना जो सोचा था वो भी घटा, परम् तेरी अनुपम कृपा से।
जुदा था अब तक अपने कर्मों से, पास आया आशीष से तेरे।
अनोखा है प्यार तेरा, बनाये सशक्त हम जैसे दुर्बलों को।
आशक्त विषयों से छुड़ाके लाता है मार्ग पे परम् पिता तू।
दिल को निष्कपट बनाते है निर्मल प्रेम गीत तेरे – हमको।
हर लेता है तु हमसे – हमको बाँधके प्रेम ठोर में अपने।
लेने ना देते है चैन तुझको करके मन की मनमानी।
जब – जब फँसते है कर्मों के जाल में गुहार सुनके आया मदद को तू।


- डॉ.संतोष सिंह