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Hymn No. 1368 | Date: 04-Nov-1999
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कुछ नहीं बनके रह लेने दे चरणों में तेरे प्रभु ।
कुछ नहीं बनके रह लेने दे चरणों में तेरे प्रभु ।
कुछ नहीं का कुछ ना होगा, आयेगा हमको मज़ा इसमें।
मजा होगा सब बात में, चाहे मिलती रहे कितनी भी सज़ा।
रजा चाहता हूँ कुछ नहीं कि रोम–रोम में तुझको बसाने के वास्ते।
रम जायेगा ये हृदय कुछ ना बनके ख्वाबों में तेरे।
शुमार करेंगे मेरा सब कुछ, कुछ ना बनके तेरी महफिल में।
प्यार ही प्यार होगा पर मन पे छाप होगा कुछ नहीं का।
यूँ देना सौगात कुछ नहीं का कुछ नहीं का आयेगा मजा।
चाहेगे तुझे हम कुछ नहीं बनके, चाहे समझें कोई कुछ भी।
होगा नहीं कोई भाव दिल में, जब अभाव होगा कुछ नहीं का कुछ नहीं में।


- डॉ.संतोष सिंह