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Hymn No. 1378 | Date: 14-Nov-1999
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तुझसा खूबसूरत ना है कोई इस जहाँ में, धड़क उठता है दिल देखते ही तुझको।
तुझसा खूबसूरत ना है कोई इस जहाँ में, धड़क उठता है दिल देखते ही तुझको।
मचल उठता है तन-मन मेरा पास पहुँचके तेरे, रह नहीं पाता हूँ मैं कुछ कर जाने के वास्ते।
होश में ना रहता हूँ, हटायें ना हटती है प्रभु निगाहें तुझपर से।
तेरा कहा हुआ भी सुन नहीं पाता, मन को कुछ और तेरे सिवाय ना है सूझता।
रूचता नहीं है कुछ भी मुझे, तुझसे मिलके खिल उठता है रोम-रोम मेरा।
कहने को रहती है बातें बहुत, मिलते ही अवरूध्द कंठ से फूट पाते नहीं बोला।
तेरी मर्जी में आये तू खेलना प्यार से मेरे, पर रखना ना तू कोई शिकवा।
प्रिय जो भी होगा हाल मेरा मंजूर है पर, रहूँगा महफूज प्यार में तेरे।
मिट गयी है मेरी हर चाहत जबसे बन गया हूँ मुरीद मैं तेरा।
जाग उठी है इक् नयी तमन्ना गुजार दूँ जीवन तेरा साया बनके।


- डॉ.संतोष सिंह