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Hymn No. 1380 | Date: 15-Nov-1999
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सिखा दे, सिखा दे हमको तू कुछ कहना, सामने तेरे दिल को खोलके रख देना।
सिखा दे, सिखा दे हमको तू कुछ कहना, सामने तेरे दिल को खोलके रख देना।
मौन होना पड़ा तो कोई बात नहीं, पर नजरों ही नजरों से कहना बता दे तू।
आया नहीं अब तक हमको कुछ ना, बिताया है जीवन बहुत कुछ के बीच कुछ ना बनके।
जो कुछ भी घटा अच्छा ही घटा तेरी दया से, भाग्य में न था शुरू से कुछ हमारे।
तरस तो बढ़ती जा रही है तुझे जानने की, पर मान देना सीख न पाया अब तक।
खुशियों से न था कभी वास्तां हमारा, कमियाँ तो एक ढुँढ़ेंगे तो मिलेगी हजार।
चाहते तो तुझसे बहुत कुछ है हम, लड़ना सिखा दे तू हमको हमारी कमियों से।
भटका हूँ कई बार, भटकने ना देना तू इस बार, दे देना तेरा हमको आशीर्वाद।
छुपाना न आया, छुपाना ना चाहूँ तुझसे जो बात उठे दिल में फट् से उसे तू जान लेना।
इस जनम मैं गर लायक ना है तेरे, तो अंत कर दे इसी पल जीवन का मेरे।


- डॉ.संतोष सिंह