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Hymn No. 1381 | Date: 15-Nov-1999
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बेमानी हैं तेरे बिन हर वो चीज जो जुड़ी ना हो तुझसे।
बेमानी हैं तेरे बिन हर वो चीज जो जुड़ी ना हो तुझसे।
खोजा इस सारे जहाँ में पाया ना कुछ भी जुड़ा जो ना हो तुझसे।
मंदिर हो या मस्जिद गया कई-कई बार सि दें न पाया एक बार।
लगाया गोता कृपा से तेरे भीतर, अपने रहबर को राह देखते पाया।
जो कीताबों से सीख न पाया, वो सीख गया प्रेम भरे नजरों से तेरे।
धर्मसंकट में रहता था कुछ कहने से डरता था, तेरे मस्ती में मौज मनाने लगा।
दिन गिनना भूल गया हूँ, तेरे संग रहके जीने का अंदाज जो बदल गया।
प्यार ज्यों – ज्यों गहराता जा रहा है, नोंक – झोंक बढ़ती जा रही है तुझसे।
डराया करते थे जो लोग मुझे, अब प्यार उनपे आता है बहुत।
दीन – हीन बनके ना है जीना, ताकतवर रहके दीन–हीन रहना चाहूँ।
- डॉ.संतोष सिंह
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सिखा दे, सिखा दे हमको तू कुछ कहना, सामने तेरे दिल को खोलके रख देना।
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