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Hymn No. 1382 | Date: 15-Nov-1999
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सुनो – सुनो मेरे दिल की कहानी, जो अनकही थी अब तक।
सुनो – सुनो मेरे दिल की कहानी, जो अनकही थी अब तक।
देखा न था पर प्यार करता था तुझसे, पर जताना सिखा न था।
अब तो तू आ गया पास हमारे, मिटा दे तेरे – मेरे बीचके भेद सारे।
तरसा बहुत, तरसाना ना हमको, उड़ेल दे तेरे प्यार की अनमोल धारा।
सच्चा – झूठा करते वक्त न जाना था हमने, हाँ दिल से तूझे माना है अपना।
कुछ पाने के वास्ते आये थे पास तेरे, मिलते ही तुझसे बदल गयी चाहत हमारी।
आहत मन को राहत मिली तेरे अमृतमय गीतों को सुनते हुये।
बोझिल जीवन में फूटा प्रेम का अंकुर, जिसने दिया नवजीवन हमको।
हिलोरे लेने लगा मस्ती में, फूटा इस नीरस के भीतर से प्यार का गीत वास्ते तेरे।
जीतना ना है मुझको किसीको, जीतना चाहूँ अब मैं सिर्फ तुझही को।


- डॉ.संतोष सिंह