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Hymn No. 1384 | Date: 15-Nov-1999
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महफूज रखना तू मुझे प्यार में, व्यवहारिकता में टिक न पाऊँगा कभी।
महफूज रखना तू मुझे प्यार में, व्यवहारिकता में टिक न पाऊँगा कभी।
जीत के लिये दौड़ना मेरे वश में नहीं, हार – जीत से परे रहना चाहूँगा मैं।
सबलताओं के बीच में खड़ा मैं निर्बल, पर कोशिश किये बिन रहूँगा नहीं मैं।
निकला हूँ राह में मैं अकेला, लाभ हो या होन तेरा प्यार चाहूँगा जरूर।
हजूर है तू मेरा, तेरा कहा हुआ करूँगा जरूर, पर करने का सहूर हो या ना हो।
दिन हो या रात मन में है एक ही बात कैसें भी करकें सदा के लिये तेरा हो जाऊँ।
बहानों की खान ना है खड़ी करना, अच्छी हो या बुरी दिल की हर बात बताये बिना ना है रहना।
वहन कर ले जाऊँगा सब कुछ, बस पड़ा रहना सदा तू मेरे पीछे।
त्याग की बात बहुत की हमने, त्याग करना सिखा दे तेरे वास्ते तू हमको।
आहिस्ता – आहिस्ता ना होगी जरूरत कहने की बिन कहे समझेगा दिल हर बात तेरी।


- डॉ.संतोष सिंह