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Hymn No. 1385 | Date: 15-Nov-1999
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मचल रहा है दिल पीके प्यार का जाम, होश में कैसे रह पायेंगे हम।
मचल रहा है दिल पीके प्यार का जाम, होश में कैसे रह पायेंगे हम।
दम रहा सहा जो भी था निकल गया, तेरे प्यार में जो खो गये हम।
जब याद आ जाता है तू हमको तो जिस्म हो जाता है बेजान सा।
पाया है बहुत कुछ तुझसे अब खोना चाहूँ सब कुछ वास्ते तेरे।
हसरत मिटती जा रही है एक –एक करके, सारी कसरत करता हूँ तेरे लिये।
खबर ना है हमको किसीकी, बेखबर तेरे प्यार में बनके खबर बन गये हम।
साथ ना चाहिये हमको अब किसी का जो साथीदार हो गया हो तू।
दिल में हुयी हर हलचल को शब्द देना नामुमकिन होता जा रहा है प्यार में।
मजा आता है यूँ ही, मजा आने के लिये कहना ना पड़ता है कुछ।
लुटेरा बन गया हूँ, तसवीर से तेरी नजर मिलाके लूट लेता हूँ प्यार तेरा।


- डॉ.संतोष सिंह