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Hymn No. 1394 | Date: 20-Nov-1999
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तड़पते हुये दिल को आसरा है तेरा, जहाँ में सब कुछ होते हुये कुछ ना है मेरा।
तड़पते हुये दिल को आसरा है तेरा, जहाँ में सब कुछ होते हुये कुछ ना है मेरा।
फरियाद ना करता हूँ, फरियाद ना करना है, विचरना चाहता है तेरी यादों में मन मेरा।
हर दरकार खत्म होती जा रही है, ज्यों – ज्यों भरता जा रहा है मन आस्था से।
तेरे सिवाय सरोकार ना रह गया किसीसे, चाहे रहूँ मैं किसी के साथ।
उबर जान चाहता हूँ अपनी आदतों से, बदल जाना चाहता हूँ प्रभु तेरे वास्ते।
लेना तू इम्तिहाँ कितना भी पर रखना अपनी धुन में हमको सदा।
अदा कर नहीं सकता कर्ज तेरा, फिदा हो गया मेरी जान जो तुझपे।
क्या करना, क्या ना करना मुझे ना है पता कुछ, आया हूँ जहाँ में सिर्फ तेरे वास्ते।
पाना होगा तो गर चाहूँगा तूझे पाना, खोने की बात पे खो दूँगा खुदको कदमों में तेरे।
ज्ञान नहीं मुझे और कहीं दोजख भी मिले तेरे वास्ते तो करुँगा कबूल।
निर्मूल कर दे मेरे मन के हर भावों को तेरा बन जाने के वास्ते ।


- डॉ.संतोष सिंह