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Hymn No. 1397 | Date: 21-Nov-1999
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तंग हुआ मन, हो गया दंग देखके प्यार तेरा।
तंग हुआ मन, हो गया दंग देखके प्यार तेरा।

नामाकूल को मालूम न था, वो भी काबिल हो गया प्यार को तेरे।

यूँ ही दिशाहीन होके भटका करते थे जग में।

दिशा मिल गयी प्रभु जब हो गयी कृपा तेरी।

शरारत से भरा था जीवन, हर पल कुछ ना कुछ जूझता था मन को।

भटकता हुआ मन अटका प्यार देखके तेरा।

जीवन में हो जाये कुछ भी अब फर्क ना पड़ेगा मुझपे।

जब तक दिलों से जन्मा करेंगे प्रेम भरे गीत तेरे।

बहुत रह लिया होश में, मिटता जा रहा है जोश।

दोष ना है किसीका, बेसुध हो जाने दे प्यार में तेरे।

लगे है दामन पे कई दाग, फिर भी दिल है बेदाग।

अहित-हित से परे होके जुड़ जाना चाहता हूँ तुझसे।

निर्मूल होना है कई दोषों का, जिनका स्वामित्व है पास मेरे।

तर्क को डालता हूँ कुएँ में, श्रध्दा हो है अंधरी तेरे पीछे।

हाल जो भी होगा मेरा अच्छा या बुरा स्वीकारँगा समझके गयी कृपा तेरी।

रोकना–टोकना ना अब मुझे, होता हूँ पागल हो जाने दे।


- डॉ.संतोष सिंह