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Hymn No. 1398 | Date: 23-Nov-1999
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बताता गया तू सब कुछ हमको, फिर भी जान न सका मैं तुझको।
बताता गया तू सब कुछ हमको, फिर भी जान न सका मैं तुझको।
भेद न बरता, बरसायी कृपा सदा हमपे, इक् सा फिर भी ग्रहण करना न आया।
जाने ना दिया तूने हमारी इक् बात को खाली, फिर भी अर्थों को समझाना न आया।
कभी बंधा ना बाँधा हमको किसी बंधन में, फिर भी स्वतंत्र रहना न आया।
धीरे–धीरे दिया सब कुछ अपना–अपना बनाने के वास्ते, फिर भी अपनाना ना आया।
कीमतो की परवाह ना की, देता रहा अमूल्य धरोहर अपनी, फिर भी उसके अनमोलता को समझ न पाया।
सुख में रखने के वास्ते उठाया हमारे कर्मों का भार तूने, फिर भी तेरे हृदय की जीतना न आया।
क्या न किया और क्या न करता रहा, फिर भी जैसे न मानने की कसम खायी है हमने।
दोष ना था कभी तेरा बखेढ़ा किया सदा से हमने फिर भी मिटाया तूने बखेड़ा को हमारे।
कब-कैसे-क्यों हो जाता है हमसे, सचमुच समझ क्या छोटी है हमारी, काबिल बना दे प्रभु तेरे वास्ते।


- डॉ.संतोष सिंह