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Hymn No. 1399 | Date: 23-Nov-1999
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छीन ले मुझसे तू सब कुछ, छीनना ना मुझसे तू तुझे कभी।
छीन ले मुझसे तू सब कुछ, छीनना ना मुझसे तू तुझे कभी।
होगी लाखों कमियाँ हममें, पर तेरी चाहत ढल गयीं श्वासों में मेरे।
दुनिया की हर रस्में तोड़के, अपनाने की चाहत जन्म लें चूकी है मन में।
अपना बनानें के लिये तुझे, निभा ले जाऊँगा अनचाहे रिश्तें।
प्यार तेरा पाने के वास्ते जो कीमत चुकानी पड़ेगी चुकायेंगे उसे।
फरियाद मैं कहता नहीं तुझसे, बताता हूँ हाल दिल का तुझे अपना।
जीना पल भर को अच्छा ना लगता है प्रियतम् तेरे बिना।
कसूर कितना भी हो मेरा, मैं तो बन चुका हूँ तेरे दामन का टुकड़ा
बदतर हो जाते है हालत मेरी, जब तुझको करीब पाता नहीं।
अतिश्योक्ति होगी मेरे कहने में, पर तू उतरके देख ले दिल में मेरे।


- डॉ.संतोष सिंह