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Hymn No. 1400 | Date: 24-Nov-1999
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रह नहीं सकता मैं तेरे बिना, जुड़ गया हूँ जो तुझसे इतना।
रह नहीं सकता मैं तेरे बिना, जुड़ गया हूँ जो तुझसे इतना।
हाल कितना भी होगा बेहाल, सह जाऊँगा जो पिया हाथों का प्याला तेरे।
पल्ले ना पड़े किसी और के इतना, जो पड़ गये पाले में तेरे।
पीने–पीलाने के बाद की छोड़, मचल उठता है दिल देखते ही तुझे।
होश में ना रहने के वास्ते आया हूँ, बेसुधी चाहता हूँ प्यार में तेरे।
दर्द और दवा है हाथों में तेरे, इलाज कर या लाईलाज कर रे।
मरते दम तक ना छोडूँगा जान तेरी, निकल जाये चाहे भान मेरी।
प्यार मैं तेरा सबसे पुराना, बाँधना चाँहू तुझको प्यार के सहारे।
रहबर सचमुच कुछ ना है हाथों में मेरे, फिर भी देखूँ ख्वाबों में तुझे।
जोशों – खरोंश को होने ना होने देना ठंडा, बढ़ाते जाना तेरे प्यार से उसे।


- डॉ.संतोष सिंह