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Hymn No. 1401 | Date: 24-Nov-1999
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लड़ना है मुझको सबसे तेरे प्यार को पाने के वास्ते।
लड़ना है मुझको सबसे तेरे प्यार को पाने के वास्ते।
अब ना है कुछ जरूरी, मजबूर हो गया है दिल के हाथों।
बातों ही बातों में निकले हर बार यार की बात अब।
ना दे सकता हूँ किसी का जवाब मैं, ख्वाबों में रहूँ यार के जो।
प्यार मेरा है सदियों पुराना, प्यार जागा है जो आज।
बाज न आऊँगा प्यार करने से, लेना पड़े चाहे कितने जनम्।
मन में ना रह गया अब कुछ, मन मेरा समा गया जो तुझमें।
आजमा ले तू कितना भी, जमाने के लिये न आया हूँ मैं।
सजके निकलूँगा न रख के शिख तक, तुझको रिझाने के वास्ते।
तड़पूँगा तेरे प्यार में इतना, पसीज उठे दिल तेरा देखके प्यार मेरा।
- डॉ.संतोष सिंह
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रह नहीं सकता मैं तेरे बिना, जुड़ गया हूँ जो तुझसे इतना।
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