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Hymn No. 1402 | Date: 24-Nov-1999
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अमक-दमक-चमक रोक न पायेगा मुझको कोई, बढ़ चला जो मैं तेरी ओर।
अमक-दमक-चमक रोक न पायेगा मुझको कोई, बढ़ चला जो मैं तेरी ओर।
कामनाओं की आँधी आये या तूफा, मुझको रोक ना सकता कोई अब जो तू भा गया।
कितने भी आये उतार-चढाव जीवन में, करेंगे पूरी आधी–अधुरी यात्रा को हम।
चिंता की सेज रखना तैयार तू, तेरे इशारे पे पलक झपकते कूदेंगे हम।
बेदम है तन तो क्या, मन दमदार हो चुका है तेरे प्यार का घूँट पीके।
चूरचूर कोई क्या करेगा चूरचूर हो जायेगा, हम तो चूर है तेरे प्यार के नशे में।
बेकसूर ना था मैं कभी, हाँ बेकसूर है तेरा प्यार सदा से।
तेरा ऋण अदा करना मेरे वश की बात ना है, डूब जान चाहता हूँ फिर भी तुझमें।
ओठों पे हो या ना हो सब की बातों का जवाब, पर दिल में गूँजे सदा तेरा नाम।
शुरूआत से अब तक किसी काम का ना था मैं, प्यार जो हुआ और बेकार हो गया।
- डॉ.संतोष सिंह
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लड़ना है मुझको सबसे तेरे प्यार को पाने के वास्ते।
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