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Hymn No. 1403 | Date: 25-Nov-1999
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मंजिल जितनी पास है उतनी दूर है मुझसे।
मंजिल जितनी पास है उतनी दूर है मुझसे।
फिर भी ना कोई फिक्र है, दिल में प्यार है प्रिय का जो।
याद करके बढ़ायेंगे हर कदम पुरूषार्थ से।
आशाओं – निराशाओं को चीरते हुये मन जुड़ा रहेगा जो प्यार से।
हावि ना होने देंगे दुनिया को, हावि होगा जो प्यार मेरा।
छिन्न–भिन्न होता रहे तन, उफ ना करेंगे लेंगे नाम यार का।
अंदाज होगा कुछ ऐसा हर कदम पे निभायेंगे यार का साथ।
बढ़ रहे है उसके लिये, खुद को उसमें खोने के लिये।
प्यार है मेरा खालीश, खोने–पाने के वर्जनाओं से परे।
शहादत देने को तैयार हूँ, मौका दे देना बस तू।


- डॉ.संतोष सिंह