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Hymn No. 1405 | Date: 26-Nov-1999
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ना सोचना हो ना समझना, प्रभु तेरे प्यार में ऐसा तू रंग देना।
ना सोचना हो ना समझना, प्रभु तेरे प्यार में ऐसा तू रंग देना।
आये जीवन में कैसा भी पल, विमुख ना हो पल भर के वास्ते मेरा मन।
खोना हो या पाना, तेरे सिवाय किसी से ना जुड़े खुशी हो या गम।
मन हो उदार इतना, जीवन में आना – जाना किसीका हो, खोया रहे वो तुझमें।
बदल जाये मेरे मन के सारे लोभ, अनुपम प्यार में तेरे।
किंचित ना रहना चाहूँ होश में, होश भी गुम हो जाये प्यार में तेरे।
यार तड़पाना तू हमको बहुत, तड़प हमारी विवश कर देगी प्यार करने को तुझको बहुत
छलिया है तू सबसे पुराना, छल ले तू मेरी सारी इच्छाओं को।
सुनाने ना बैठा हूँ अपनी कमियों का रोना, मैं तो प्यार करना चाहता हूँ तुझसे।
अटपटा हो सकता है प्रभु कहने का ढंग, पर प्यार मेरा चटपटा है प्रभु।


- डॉ.संतोष सिंह