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Hymn No. 1406 | Date: 26-Nov-1999
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जो ठान लिया तो बगैर किये मानूँगा नहीं।
जो ठान लिया तो बगैर किये मानूँगा नहीं।
कीमत कितनी भी चुकानी पड़े पीछे हटने का नाम ना लूँगा।
करने के तौर – तरीकों पे होंगे मेरे ऐतराज बहुत ।
पर करना है तो करके ही लूँगा दम तेरे नाम से।
हलक से उतारा प्यार का जाम तो परवाह नहीं।
होगा मेरा जो भी हाल, डूबे बगैर नशे में मानूँगा नहीं।
पकड़ा है जो हाथ तेरा लूंगा ना छोड़ने का नाम।
कटता है तो कट जाने दूँगा सर, प्यार को ना दूँगा खोने।
कुछ ना रह गया अब जरूरी जीवन में प्यार के सिवाय।
पूर्ण रूप से कर लेने दे तू अर्पण मुझको आज तुझपे।
ना कुछ होगा अब मेरा, जो कहेगा वो करुँगा काज।
सजा दे मेरे तन के वास्ते तू सेज, वक्त से पहले हो जाये मिलन तुझसे।
सब कुछ खोने के वास्ते हूँ तैयार, पर गुम हो जाऊँ जो तेरे प्यार में।
हाथों में ना था ना कुछ रहेगा, तेरे यहाँ से चला था पहुँचेंगा तेरे यहाँ
मन की मनमानी रूक गयी है, जब से दिल अटका है तुझपे।


- डॉ.संतोष सिंह