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Hymn No. 137 | Date: 16-Mar-1998
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बनत – बनत बन जाये जो सोचा था वो भी हो जाय,
बनत – बनत बन जाये जो सोचा था वो भी हो जाय,
अगर हाथ हो सद्गुरू का आधे पर तो पल भर में काम बन जाय ।
बेख्याली में तन डूबा रहे, मन में हर क्षण रहे उनका ख्याल,
परवाह किसे किसकी करनी है, जब हर क्षण रहे साथ उनका ।
दिल में ही हलचल तो बस उन्हे पाने की, पाके खुदको भूल जाने की,
साथ हमारा ऐसा रहे जैसे कमल के बिना भौरा का जीवन सुना ।
दीवानगी का आलम हो हर तरफ तू ही तू नजर आये;
अपने – पराये का भेद भुला बैठूँ, सब तरफ तू नजर आये ।
मेरी हर हसरत तुझसे ही जनमी है, तो तुझे ही पूरी करनी है ;
कुछ भी तूझे अर्पित किया तो अर्पित करने का बोध ना हो मुझे।


- डॉ.संतोष सिंह