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Hymn No. 1408 | Date: 26-Nov-1999
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तू है मेरा प्यार, मैं हूँ तेरा यार, रहता है दिल मिलने को बेकरार।
तू है मेरा प्यार, मैं हूँ तेरा यार, रहता है दिल मिलने को बेकरार।
मिलके करना चाहता हूँ तुझसे अपने मन का हर सपना साकार।
जजबातों का हें तूफाँ मन में खोल के रख देना चाहता हूँ दिल को।
सिलसिला शुरू करना चाहता हूँ प्यार का, जो मौत का डर निकल गया मन से।
भावें के नजराने सौंपना चाहता हूँ तुझको जो उपजता है दिल से मेरे में।
खो जान चाहता है दिल मेरा – तुझमे अनवरत् काल के लिये।
राहत मिलती है दिल को जब होता है तू सपनों में साकार मेरे।
आकार भर रह गया है सबकुछ मेरे वास्ते, जब से प्यार हुआ है तुझसे।
देनी पड़ेगी कोई अग्निपरीक्षा तो दे देंगे, दिल पहुचेगा तेरे पास प्यार लेके।
यें है मोहब्बत का जोर, माफ करना ऐं खुदा, जो ढाल दिया तुझको प्यार में।


- डॉ.संतोष सिंह