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Hymn No. 1412 | Date: 27-Nov-1999
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यार मेरे तू इतना तो बता दे, प्यार में मेरे कहीं स्वार्थ तो नहीं।
यार मेरे तू इतना तो बता दे, प्यार में मेरे कहीं स्वार्थ तो नहीं।
शुरूआत में किया था स्वार्थ से, क्या अब भी मन में कोई स्वार्थ है।
अगर है तो निकालना जनाज़ा मेरा, दे देना दुनिया के सारे दर्द तन पे मेरे।
तिल – तिल तड़पूँ हर तड़प पे चोट पहुँचे लोगों के हाथों से मुझको।
मौत ना देना तू इतनी जल्दी, दर्द का हर लम्हा हो कई बरसों तक।
तौबा करें लोग, दातों तले उंगली दबाके, इतनी बुरी मौत तू मुझको देना।
अधिकार हो सबको मुझे मारने का, मारके आधा जला दें जिंदा।
अनंत काल तक बताना तू सबको ये कहानी, तौबा करें लोग पापमय जीवन से।
हर बरस तू दोहराना ये खेल, कहीं भी रहूँ तड़पूँ मैं खूब।
सबक ऐसा तू देना मुझे, काँपे मेरा तन-मन देखके तुझे, तेरे भक्तों को।


- डॉ.संतोष सिंह