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Hymn No. 1415 | Date: 28-Nov-1999
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जम के पिलाना तू इस बार, उतारें ना उतरे जीवन के बाद।
जम के पिलाना तू इस बार, उतारें ना उतरे जीवन के बाद।
आबाद हो जाऊँ या बरबाद, मुझे प्यार का जाम पिलाते रहना।
सह जाउँगा मैं सब कुछ, तेरे बिना पल भर को रह ना पाऊँगा।
निश्चिंत हो चुका है दिल मेरा, जब से पहुँचा तेरे करीब मैं।
नसीब की परवाह किसे, जब नसीब बनाने वाला मिल गया हो।
अंजाने प्यार में बेअदब हो गया मैं, मस्ती में आके जो चूमा तुझको।
खाम ख्याली बन गयी हकीकत, जो छा गयी तेरे प्यार की लाली।
लगती ना है अब किसी की गाली, जब से बना तू इस फूल का माली।
खाली-पीली का नहीं है शोर, यें तो है दिल का जोर।
नागवार लगे तो माफ करना, नामाकूल का दिल हो चुका है दीवाना।


- डॉ.संतोष सिंह