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Hymn No. 1418 | Date: 01-Dec-1999
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आसमां हो या तारे चलते है इशारे पे तेरे सारे।
आसमां हो या तारे चलते है इशारे पे तेरे सारे।
दुनिया को हर प्रथक सत्ता करती है कार्य कहेनुसार तेरे।
बनाया हुआ है इंसा तेरा पर करता हें अपने मन की सदा।
जुदा हुआँ इक् बार जो तुझसे, भटकता फिरा जन्मों जनम जहाँ में।
अदा ना किया कभी शुक्रिया तेरा, उल्टा दोष मढ़ते रहा सर पे तेरे।
फिर भी तूने पास बुलाया, बुलाके अपनी सत्ता का राज समझाया।
कई - कई बार खायी ठोकरें, फिर भी सम्भलके चलना ना सिखा।
फिर भी तूने प्यार बरसाया, तेरे प्यार को बिन समझे कर्मों को दोहराया।
कब जागेगा निर्मल प्रेम तेरा, अंत कर दे तू इस नीरस जीवन का।
बहुत भटका– अब कुछ हाथ न आया, तेरे प्यार के आगे सब कुछ बेकार पाया।


- डॉ.संतोष सिंह