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Hymn No. 1435 | Date: 10-Dec-1999
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कोई कहानी ना कहता हूँ, हाल दिल का हूँ सुनाता।
कोई कहानी ना कहता हूँ, हाल दिल का हूँ सुनाता।
कुछ पाने के लिये न आया हूँ, खोना चाहता हूँ प्यार में तेरे।
सौदेबाजी ना करने आया मुझे, प्यार करना सिखा दे तू हमें।
मैं तो हर पेशा छोड़ प्यार का पेशां अपनाना चाहता हूँ।
हाँ हाथों में न था कभी कुछ मेरे, चाहिये तो ले ले दिल।
ना होगा कुछ सोचना–विचरना, धड़कूँगा तेरा प्यार बनके।
यार ना है कुछ मुझे बनना, ना ही चाहूँ कुछ सोचना–समझना।
मेरा मैं मिट जाये, जीवन हो या मौत प्यार तुझसे करूं।
अरे ङङ मुझे ना सम्भालो, फिसल जाने दे यार प्यार में तेरे।
प्यार के पास पहुँचने के वास्ते ढल जाने दो प्यार में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह