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Hymn No. 1438 | Date: 13-Dec-1999
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जानते हो तुम सब कुछ, पर कह लेने दो दिल की हर बात।
जानते हो तुम सब कुछ, पर कह लेने दो दिल की हर बात।
पास आया तेरे कई-कई बार, पर कह न पाया दिल की बात।
हो हाथों में हाथ तेरा कंधे से लगके सर, निहारूँ बंद आँखों से तुझें।
ऐ ss परवर दीगार सामीप्य चाहता हूँ इतना, मिट जाये तन-मन की दूरी।
हर मजबूरी हो जाये खत्म, रह न जाये प्यार के सिवाय कुछ जरुरी।
पास या दूर की कोई बात ना हो, जहां में जहाँ रहूँ हो साथ तेरा।
ऐ ss नाथों के नाथ पूरी कर दें रजा, इस अनाथ को न के संग अपने।
सपने बदल जाये हकीकत में, जो अंत हो जाये मेरा प्यार में तेरे।
फरियाद की ना रह गयी जरूरत, यें तो है दिल की दरखास्त।
यह आज ना तो कल होने वाला है, यह है प्यार भरी ललकार।


- डॉ.संतोष सिंह