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Hymn No. 1439 | Date: 13-Dec-1999
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प्रभु जी पुकार रहा है दिल मेरा, गीतों से भरी दो बूंद के वास्ते।
प्रभु जी पुकार रहा है दिल मेरा, गीतों से भरी दो बूँद के वास्ते।
कमीं ना है तेरे पास प्रेम सुधा सागर की, बुझा दे प्यासे हुये की प्यास को।
रह जाता हूँ गुनगुना के, अस्पष्ट शब्द ढल नहीं पाते है स्वरों में।
ऐसी कौंन सी कमीं है हममे, जो आड़े आती है गीतों को गाने से।
जन्म देने वाला है तू, फिर क्यों नहीं ग्रहण कर पाता है दिल मेरा।
तिरना चाहता हूँ सब कुछ भुलाकें तेरे अथाह प्रेम सागर में।
होश ना हो वहाँ कुछ, अपना दौर चले एक से एक नये – नये नगमों के।
सुख – दुख से ना हो कोई वास्ता, यूँ ही नगमें बनते रहे तेरा अप्रतीम प्यार देखके।
मैं नादान सही, पर दे दे तू मुझे वरदान, हर पल नया नगमा सुनाने के वास्ते।
अंत चाहता हूँ तेरे अंतहीन प्रेम सागर में बनके प्यार का नगमा।


- डॉ.संतोष सिंह