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Hymn No. 1441 | Date: 13-Dec-1999
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जो बात तुझमें है वो कहीं और नही इस जहाँ में।
जो बात तुझमें है वो कहीं और नहीं इस जहाँ में।
रहा नहीं जाता तेरे बिना, रहूँ चाहे कहीं भी संसार में।
कुछ याद नहीं आता, जब रहता हूँ खोया हुआ पास तेरे।
सिलसिला कब तक चलेंगा मिलके बिछुड़ने का अंत कर दें तू आज इसे।
दूर होता है जब तुझसे, दूर है नहीं हमतो दिल में तेरे।
वास्ता किसी और से ना चाहता, सिर्फ हो जाये तुझसे।
पल-पल भी दे जाता है सिलसिला अंतहीन इंतजार का।
जानेमन समझ नहीं पाता समझके तेरे-मेरे प्रीत के दुश्मन को।
हालात से खुद ही ना उबरना चाहता हूँ कि हालात का है इम्तिहान।


- डॉ.संतोष सिंह