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Hymn No. 1446 | Date: 15-Dec-1999
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कुछ कहना चाहता है दिल मगर, कुछ कह नहीं पाता।
कुछ कहना चाहता है दिल मगर, कुछ कह नहीं पाता।
मन में रहती है बात बहुत सी, मगर भूल जाता हूँ आके पास तेरे।
ऐ रब कब आयेगा वो पल, जब होगा बेकरार तू सुनने को मुझे।
सावन – भादो शरमा जाये, याद कर – करके करुँगा बरसात नयनों से।
दूर करना चाहूँ हर उस कमीं को, जो दूर रखे है तुझसे।
हम जानते है तूने ना कि बेवफाई, बेवफा तो थे हम शुरु से।
ऐ मेरे यार तड़प – तड़पके दे दूँगा जान, आने ना दूँगा प्यार में तेरे इल्जाम।
सच झूठ से ना मतलब है मुझे, तुझे पाने के लिये करुँगा कुछ भी।
नसीब में है दोजख तो करुँगा कबूल उसे, यार दौड़के आयेगा तू प्यार देखके मेरा।
हँस लें आज दुनिया मुझपे कितना भी, पूरी करेंगे हम हर तेरी बात।


- डॉ.संतोष सिंह