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Hymn No. 1451 | Date: 16-Dec-1999
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मुझे चाहीये खबर तेरे पल – पल की, रह न पाऊँ बगैर तेरे एक पल भी।
मुझे चाहीये खबर तेरे पल – पल की, रह न पाऊँ बगैर तेरे एक पल भी।
लुटा रहा हूँ अपनी साँरी अमानत, खैर ना होगा जो हो न पाया तेरा।
जहर होता जा रहा है दूर रहना तुझसे, अगर – मगर ना – रहना है मुझे पास तेरे।
कसूर हो चाहे कुछ भी मेरा, डूबे रहने देना मुझको तेरे प्यार के सुरूर में।
अगर किसी बात का कोई गर्व हो मुझे, तो उसे तोड़ना तू पलक झपकते।
यार अब पाट लेना चाहीये तेरे – मेरे बीच की हर दूरी को जो हो गयी है जरूरी।
मजबूरी ना है मुझे किसी बात की, तेरे प्यार से ज्यादा कुछ ना है जरूरी।
तुझे बनाया है हमदम अपना, निकल जाये चाहे जान उफ तक ना करेंगे।
तू भी ना छोड़ना राहे प्यार के बीच में, हमने भी किया है इंतजार सदियों से।
प्यार में हो गयी होगी कोई अदावत, तो उसे तू ना समझना बगावत।


- डॉ.संतोष सिंह