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Hymn No. 1453 | Date: 17-Dec-1999
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प्रभु न जाने क्या सूझी इस मतवाले को जो ले चल चाहे तुझे डिस्कोथेक में।
प्रभु न जाने क्या सूझी इस मतवाले को जो ले चल चाहे तुझे डिस्कोथेक में।
थिरकाता है तू हमारे मन को, प्यारे – प्यारे गीत सुनाके, मजबूर है हम तेरे वास्ते।
झूमना चाहता है सामने तेरे दिल मेरा, जब जी में आये खुशी से चुम - चुमके।
खत्म हो जाये आज तेरे – मेरे बीच की किसी भी दूर को, कर दे प्यार मेरा मजबूर तुझे इतना
सनम जनमों – जनम का सपना हो जायेगा साकार, जो कर दे तू पूरा दिल के मेरे ख्वाबों को।
रब, तू तेरा रब दा चोला छोड़ के आना साथ मेरे, रही – सही झिझक मिट जायेगी मन की मेरे
मत पूछ बैंठे – ठाले खाली दिल को न जाने क्या - क्या मुझे तेरा साथ करने के वास्ते।
दोष ना देना तु मुझे दोष है तेरी नजरों का, जब भी मिले पिलाये प्याला तेरे प्रेम का।
जोश में आके कई - कई बार कह – कर जाता हूँ कुछ, माफी के बदले दे देना तेरे हाथों कोई सजा
मैं रूकना ना चाहूँ यहाँ तक, मिटने से पहले पहुँचना चाहता हूँ आगोश में तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह