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Hymn No. 1455 | Date: 18-Dec-1999
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प्रभु यहाँ गया, वहाँ गया, तेरे वास्ते जहाँ में कहॉं – कहाँ ना गया।
प्रभु यहाँ गया, वहाँ गया, तेरे वास्ते जहाँ में कहॉं – कहाँ ना गया।
इतने पास तू रहके, दूर क्यों रहता था, मुझसे समझके ना समझा ।
मेरे ह़दय में सदा से तू था, तेरे वास्ते कहाँ – कहाँ ना भटका।
हाँ इतनी तेरी कृपा थी तेरे दर पे आके न जाने दिल क्यों अटका।
सारी जिंदगी जो होता भटकना तेरे बिना, जीवन होते हुये मर जाते हम।
दम ना था हममें इतना जो जी लेते तेरे नाम बिना, ये तूने क्यों सोचा नहीं।
रोते ना है रोना तेरे पास आपे अपने दुखों का, हाल कहे बिन रह नहीं पाता।
जताना चाहता हूँ प्यार अपने भीतर का, बताते-बताते छलक आये आँखों से तो क्या करूँ।
समझदार होके तू बनता है नासमझ, समझा दे ऐसा करता है क्यों तू।
मेरें प्यार को स्वीकार ले होता रहे चाहे कुछ, हो जायैगे जीते जी हम तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह