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Hymn No. 1456 | Date: 18-Dec-1999
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प्यारे कैसे बताऊँ हाल दिल का, जब तू ना हो सुनने को तैयार।
प्यारे कैसे बताऊँ हाल दिल का, जब तू ना हो सुनने को तैयार।
कहना चाहूँ तुझसे सारा कुछ, लब पे आके रूक जाये मेरी हर बात।
ऐसी क्या हुयी थी खता जो तू न चाहे जताना, बता दे तू आज।
सुना है तेरी हर बात में होता है कोई राज, कर दे तू पर्दाफाश उसे।
माना की दगाबाजी की थी हमने, पर तू भी तो ना चूका सौदेबाजी से।
छोड़ पुरानीं बातें कर ले स्वीकार, जो हुआ है दिल को तुझसे प्यार।
मत छेड़ अब बहाना, बिना हॉं करवाये छोड़ेगा ना तुझे ये दीवाना।
सताया है तूने बहुत, सताना अब हमको इतना कि रोना आ जाये।
खोने वास्ते बचा ना है कुछ अब, खुदको खो जाने दे मुझको तुझमे।
सब जानके ना बन अंजान इतना, टूटेगा जो दिल तो रोना तुझे भी आयेगा।


- डॉ.संतोष सिंह