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Hymn No. 1457 | Date: 18-Dec-1999
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तड़प रहा है मन मोरा, तेरे प्यार रुपी बरसात में भीगने के वास्ते।
तड़प रहा है मन मोरा, तेरे प्यार रुपी बरसात में भीगने के वास्ते।
तिल – तिलके जल रहा है दिल मेरा तुझसे मिलने के वास्ते ।
बता दे तू ऐसी क्या हुयी थी खता जो बंद कर दिये तूने सारे रास्ते।
ऐसी क्रूर सजा ना दे तू हमको, तेरे पास पहुँचके तेरे न हो पाये हम।
ये अभागा न जाने किया था कौंन सा पाप, जो देनी पड़ी सजा तुझे ऐसी।
जाने – अंजाने हर पाप के लिये करता हूँ तौबा, तेरा साथ पाने के लिये।
तेरे मन में जो आये दे दे तू वो सजा, हाथ पर करना ना दूर अपने से।
रात को ख्वाब में है तू, दिन को रहता साथ तू मन के, फिर भी क्यों नहीं पाता पास।
ये है मेरी ललकार आऊँगा आज का आज पास तेरे, जो ढाला तूने प्यार के साँचें में।
दिल को है पूरा विश्वास जो करे तू वही होता है अच्छा हम सब के लिये।
- डॉ.संतोष सिंह
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