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Hymn No. 1458 | Date: 19-Dec-1999
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पकड़ी है बइयाँ जो तेरी, छुड़ायें ना छूटेगी किसीके।
पकड़ी है बइयाँ जो तेरी, छुड़ायें ना छूटेगी किसीके।
संजोया है जो दिल में यादों को, मिटायें ना मिटेंगी किसीके।
मन ने जो माना है स्वामी तुझको, बनाये बगैर रुकने वाला नहीं।
प्यार में हाल होगा जो भी हमारा, राहे प्यार से हटने वाला नहीं।
कदम जो बढ़ चले तेरी और, किसीके रोके रूकने वाला नहीं।
माला जो जपी तेरे नाम का, कोई कितना भी टोके रोकने वाला नहीं।
यार जो माना तुझको अपना, किसी और से प्यार करने वाला नहीं।
अकूट दौलत में ना है ताकत, जो मोड़ दे मुख मेरा प्यार से।
जन्नत को ठुकराना पड़ा तेरे वास्ते तो इक् बार नहीं कई - कई बार ठूकराऊँगा।
ढिंढ़ोरा हो जाये चाहे सारे जग में तेरे बगैर मानूँगा नहीं।


- डॉ.संतोष सिंह