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Hymn No. 1465 | Date: 22-Dec-1999
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धोखा देना चाहता हूँ नजरों को तेरे इक् बार नहीं कई - कई बार।
धोखा देना चाहता हूँ नजरों को तेरे इक् बार नहीं कई - कई बार।
हर बार सामने तेरे आनां चाहूँ इक् नये रूप में जो चौंका जाये तुझको।
कसमें देना चाहता हूँ हजारों – हजार तुझको, कि तू रूठे पर मान जाये प्यार देखके मेरा।
सनम सताना चाहता हूँ तुझको पर पीढ़ा हो मुझको प्यार में तड़पने के वास्ते।
नये – नये तौर – तरीकों से इजहार करना चाहता हूँ प्यार का जो छू जाये तेरे मन को।
प्यार के इस खेंल में हारना चाहता हूँ खुदको हाथों तेरे।
कुछ कमाल कर दिखाना चाहता हूँ, बेफांखता निकले जुबां से तेरे वाह मेरी जान।
अंजाम हो कुछ नया प्यार के इस खेंल का, जो हूआ ना हो प्यार की किसी दास्तां में।
चौंका देना चाहता हूँ दिल को तेरे, प्यार में कुछ – करके अनोखा।
बदनाम होना पड़ा गर तेरा मुकाम पाने के लिये तो लगायेगे हँसके गले उसको।


- डॉ.संतोष सिंह