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Hymn No. 1466 | Date: 23-Dec-1999
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यहाँ – वहाँ जहाँ में देखो जहाँ – जहाँ में है तू।
यहाँ – वहाँ जहाँ में देखो जहाँ – जहाँ में है तू।
संसार का कोई ना है कोना ऐसा जहाँ ना है तू।
फिर क्यों रहता है रीता दिल मेरा प्यार से तेरे।
भर दे मेरे तन – मन का हर कोना प्यार से तेरे।
रात हो या दिन मिले ना फुरसत प्यार से तेरे।
हर पल ओत – प्राते रहे दिल मेरा डूबके ख्यालों में तेरे।
मुक्त हो जाना चाहता हूँ मैं, विचरूँ प्रेम सागर में तेरे।
बदल जाये मेरा सब कुछ पक के तेरे प्यार की तपिश में।
होने को जो भी होगा होने दे मिट जाने दे तुझमें।
रूकना ना रहा हाथों में मेरे, खुद ब खुद बढ़ चला ओर तेरे।


- डॉ.संतोष सिंह