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Hymn No. 143 | Date: 01-Apr-1998
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प्यार के काबील हम ना थे, प्यार तूने किया ;
प्यार के काबील हम ना थे, प्यार तूने किया ;

दूसरों की छोड हम तो अपनी नजरों में गिरे हुये थे ।

उठने की लाख कोशिश की, और हँसते चले गये,

दामन जो तेरा पकडा प्यार से, कब उठ गये पता ना चला ।

तुझसे सीखा हमने औरों पे प्यार लुटाना,

प्यार लुटाके गैरों को भी अपना बनाना ।

सबसे अनमोल है प्यार पाना किसीका,

प्यार करके दुश्मन को भी जीत लेना ।

पत्थर में भी प्रगट होते है भगवान प्यार है ऐसा;

प्यार के बिन जन्नत भी है अधूरी ।

रूठे हुये को भी मनाते है प्यार से,

दिल के हर जख्म भर जाते है प्यार से।

प्यार रहता है हर एक के दिल में;

नजरों से छलकता है प्यार का जाम ।

प्यार के बिना है ये जग अधूरा,

प्यार ही पार लगाये हर जीवन की नैय्या को ।

प्यार – प्यार है प्यार से प्यार बढता जाये ;

प्यार की कोई उम्र है ना सीमा ।

प्यार में ना फरियाद है; ना दया; ना ही बेचारा ;

प्यार से मिले पूर्ण परमात्मा; इससे बड़ा कोई ना मंत्र है ।

प्यार पाना है तो हमें सबपे प्यार लुटाना होगा ।


- डॉ.संतोष सिंह