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Hymn No. 144 | Date: 02-Apr-1998
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तेरी हर अदा दिल को लुभा जात है, बेचैन मन को सुकून मिलता है;
तेरी हर अदा दिल को लुभा जात है, बेचैन मन को सुकून मिलता है;
जैसे रेगिस्तान में मीठे पानी का दरिया; इस धरा पे तेरा दर है जन्नत का टुकडा।
रूठा हुआ दिल भी खिल उठता है, तुझसे नजर जब मिली है,
हर जगह से ठोकर खाये हुये को; शरण मिलती है तेरे दर पे ।
एक बार जो देख ले तुझको, उम्र भर बस तूझे देखना चाहे ;
कुछ भी न आये मन को, बस तेरे सामने यूँ ही बैठना चाहे ।
तेरे नाम का जाम जिसने पीया, फिर उसको अपना होश कहाँ रहा,
वो तो मस्त है तेरी मस्ती में ; जीवन का हर क्षण तेरे संग जिये जा रहा है ।
खिला हुआ है फूल एक दिन मुरझा जाता है, दिन हो या रात भी बीत जाती है;
जिसने तुझको पा लिया, वह मुख, दुःख में भी, आनंद में होके निरान्नद रहता है ।


- डॉ.संतोष सिंह