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Hymn No. 145 | Date: 04-Jun-1998
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निगाह मिलते ही हर बात तुझसे कह जाता हूँ, यूँ ही बिन कहे ;
निगाह मिलते ही हर बात तुझसे कह जाता हूँ, यूँ ही बिन कहे ;
तेरे चरणों में सजदा करने का जो मजा है; उस जग में कहीं और नहीं ।
मेरी हालत क्या है इसका क्या कर पाना, मेरे बस की बात नहीं ;
मौन हो जाने का मन करता है, हर पल यूँ ही तेरी यादों में गुम हो जाता हूँ ।
तेरे दर पे आते – आते ही मदहोशी छाने लगती है होश में क्यों रहना ;
मुझको किसका है ख्याल रखना, मेरी बेख्याली में भी तेरा ख्याल है ।
तेरे ख्यालों में बस जिंदगी यूँ ही कट जाये, तो किसी खुशी का क्या काम ;
तेरे सान्निध्य में न खुशी है न गम, सुध बुध किसे रहती है होने की अपनी ।
वहाँ तो सिर्फ तू ही तू है, सिर्फ तू ही रहेगा, हम तो तेरे मन की एक तरंग है;
जो जन्मी है तुझसे घुमकें इस जगत में धीरे – धीरे तुझमें ही छुट जाना है ।


- डॉ.संतोष सिंह