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Hymn No. 1476 | Date: 26-Dec-1999
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चाहत है अनेक पूरी करनी पड़ेगी तुझे हर इक् को।
चाहत है अनेक पूरी करनी पड़ेगी तुझे हर इक् को।
चाहता हूँ सबसे पहले तुझे पाना, मिलना पड़ेगा तुझे जरूर।
चाहत है मेरी गुम हो जाऊँ सदा के वास्ते यादों में तेरे।
चाहत है हो जाने की सुंदर, कि चुरा लूं तेरे दिल को कभी।
चाहत है बन जाऊँ पूर्ण ज्ञानवान जो मिटा दे हमारे सारे भेंद को।
चाहत है कोई अमर गीत ऐसा गाऊँ, जो खींच लाये तुझको।
चाहत है कुछ ऐसा कर दिखाने की जो जील ले तेरे दिल को।
चाहत है तुझसे चिपट जाने की जो कभी बिछुड़ने ना दे हमको।
चाहत है तेरी हर चाहत बनजाये अपनी जो कर दे हर कमीं पूरी।
चाहत है कैसे भी करके तेरा अमर प्रेम को पा जाने की।
- डॉ.संतोष सिंह
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हलचल मची रहती है दिल में हर पल लेके तुझे।
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