VIEW HYMN

Hymn No. 1477 | Date: 26-Dec-1999
Text Size
हे मेरे हृदयनाथ, हे मेरे प्राणनाथ, नाथ लें तू मेरे मन को।
हे मेरे हृदयनाथ, हे मेरे प्राणनाथ, नाथ लें तू मेरे मन को।
नाचेगा ये तन तेरे इशारे पे, जैसा – जैंसा छेड़ेगा तू गीत – संगीत प्रेम के।
आबध्द हूँ, करबध्द है तन मेरा, तेरे चरणों में कर दे मन को बंधु तुझमें।
मैं ना रहना चाहूँ स्वाधीन, कर लें प्रभु तु मुझे तेरे प्रेम में आधीन।
नाचीज के पास ना है कुछ ऐसा जो चुरा ले तुझे, फिर भी स्वीकार ले कनीज को।
तेरे प्यार के मौजों पे थिरकना चाहूँ, हो मस्ती की पराकाष्ठा जिसमें भूल जाऊँ खुदको।
जुदा ना होने देंगी, जो भूलूँगा मैं शुरूआत हो जायेगी मस्ती के नये दौर की।
मैं भी बदलूँगा, बदलेगा तू भी, प्यार के अनुपम क्षणों में बंध जायेगे हम।
ना होगा कुछ भी, फिर भी होगा सब कुछ, प्यार ही प्यार होगा चारों ओर ।


- डॉ.संतोष सिंह