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Hymn No. 1480 | Date: 27-Dec-1999
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एक दो पलों की बात क्यों करूँ, मैं तो चाहूँ जीवन गुजना साथ तेरे।
एक दो पलों की बात क्यों करूँ, मैं तो चाहूँ जीवन गुजना साथ तेरे।
ख्वाबों में रहना क्यों चाहूँ तेरे संग, मैं तो हर पल तेरे साथ रहना चाहूँ।
यादों का झोंका न चाहता हूँ, श्वास दर श्वास डूबा रहना चाहता हूँ तुझमें।
तुझसे मिला स्मृति चिन्हों का कोई काम नहीं, प्यार को तेरे बसा लेना चाहता हूँ जहन में अपने।
मिलके बिछुड़ते रहने का कोई ना है मतलब, धुलमिल जाना चाहता हूँ तुझमें सदा के वास्ते।
आशाओं और निराशाओं के दौर से उठके ऊपर मस्त रहना चाहता हूं तुझमें।
मन में आते रहे गम और खुशी के भाव, प्रिय तेरे साथ हम आनंद में बसते रहे।
दम निकलता है तो निकलने देना, पर तेरा साथ ना छूटने देना कभी।
अमीर – गरीब जो भी रहूँ, रहूँ में प्रियतम् बनके तेरा सदा।
रूखसत हो जाऊँ हर चीज से जीवन में, रुखसत ना होने देना तू मुझे कभी।


- डॉ.संतोष सिंह