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Hymn No. 1484 | Date: 29-Dec-1999
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बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं विवश होके तू ना बुलाना हमको कभी पास अपने।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं विवश होके तू ना बुलाना हमको कभी पास अपने।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं हमने तुझे प्यार कभी कमजोर करने के वास्ते ना किया।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं तू ना ढलना मेरी मर्जी के अनुरूप, ढालना तू मुझको अनुरूप तेरे।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं तुझे कमजोर करने के लिये प्यार ना किया है हमने।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं प्यार का वास्ता देके तू ना उठाने देना फायदा हमको।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं मेरे आँसू सूख जाये आँखों में पर तू ना करना दया कभी हमपे
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं मेरे भावों में तू ना बहना जो तय किया वही होने देना।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं लाख कसम दूँगा तोड़ देना हर कसम जो लगे उचित वो ही करना।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं लगाम सौंपी है तेरे हाथो में तू रखना सदा तेरे हाथों में।
बिलकुल नहीं, बिलकुल नहीं मुरव्वत ना करना तू किसी बात में निकल जाये चाहे दम मेरा।


- डॉ.संतोष सिंह