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Hymn No. 1487 | Date: 30-Dec-1999
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छैल – छबीला, रंग – रंगीला मस्त कर दे सबको प्यार में अपने।
छैल – छबीला, रंग – रंगीला मस्त कर दे सबको प्यार में अपने।
लुभा ले जाये सब के दिल को बनाके दीवाना अपने प्यार का।
गम हो किसका कितना भी बढ़ा, पड़ जाये छोटा प्यार के आगे उसके।
हर आहत मन को मिली है राहत, शरण लिया चरणों में जिसने।
चुरा ले जाये दिल को सहजता सरलता उसकी, सामर्थ्यवान होके रहे चुपचाप सदा।
कानों – कान ना होने दे किसीको खबर, मालिक है तू अनंत सत्ता का।
पता ना चले क्यों आये मज़ा उसके पास रहने मे, परम् होके परमता ना दर्शाए।
अंदाज है उसका इतना निराला, रह न पाये दिल उसके बिना कहीं और।
हमने भी किया है तय लुटने का हाथों उसके, चाह निक जाये प्राण।
हर ले हमको तू इस धरा से, लेता ले चल प्यार के जहाँ में।


- डॉ.संतोष सिंह