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Hymn No. 1488 | Date: 30-Dec-1999
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प्रभु देते है दस्तक हर रोज दर पे तेरे, इक् बार तू आके चौका जा दिल को।
प्रभु देते है दस्तक हर रोज दर पे तेरे, इक् बार तू आके चौका जा दिल को।
बंदगी करना गर भूल गया तो माफ करना दिल महफूज था तेरी मोहब्बत में।
राह तकते – तकते सुध – बुध खो गया तुझमें तो आने का ख्याल कैसे करेगा दिल।
होश में तब था कि अब, क्या इसको ही कहते है प्यार का सबब।
न जाने कितने जनम लिये तेरे वास्ते, मिटके भी ना मिटी याद तेरे दिल पे से।
ये कैसा लें रहा है तू इम्तिहाँ, जो खत्म ना होने का ना ले रहा है नाम।
प्यार का अंजाम देखा हें हमने कई बार, पर तेरे प्यार के वास्ते वार जायेगे अपनी जान
रूकना – रोकना ना है अब तेरे मेरे हाथों में, दिल तो हो चुका है फिदा तुझपे।
करवा ले तू कितना भी कसरत प्यार के वास्ते, सारी हसरतों का चरम है प्यार पाना तेरा।
छेड़ ना तू मुझे प्यार को लेके मेरे, जैसा भी है यार हमने प्यार किया है बस तुझीसे।


- डॉ.संतोष सिंह