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Hymn No. 1491 | Date: 31-Dec-1999
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शुरू हो गया है दौर जश्न का, जिंदगी के छूट गये हर कश्मकश।
शुरू हो गया है दौर जश्न का, जिंदगी के छूट गये हर कश्मकश।
अश्क ना रह गया किसी से, जो यार के प्यार में खो गया।
सितम ढाने वाला बन गया सितमगर, ना रह गया कोई और सतानेवाला।
रोता हुआ चेहरा मुस्कुरा पड़ा, यार के प्यार करने का नया अंदाज देखके।
कुछ भी छुपाना मुश्किल हुआ, दिल की बात बयाँ करने लगा गीतों में।
जिस्म में है भेद तो क्या से, रूह हो गयी है एक प्यार में।
खत्म हो गया रूठना – मनाना, प्यार के सिवाय ना रहा कुछ शेष।
बदल ले तू चाहे कितना भी भेष, छलक पडता है प्यार रोम रोम से तेरे।
छुपा छुपी का खेल होता जा रहा है खत्म, समाया तू रोम – रोम में तेरे।
जाना नहीं पड़ता ढुंढ़ने अब तुझे, पहचानना सीख गया दिल ने तुझे।


- डॉ.संतोष सिंह