VIEW HYMN

Hymn No. 1494 | Date: 03-Jan-2000
Text Size
दिल में छटा छायीं हुयी है प्रभु के संग बिताये हुये पलो की।
दिल में छटा छायीं हुयी है प्रभु के संग बिताये हुये पलो की।
बरस उठे नैनो से प्रभु प्रेम की बूँदे याद कर-करकें प्रभु प्रेम को।
शांत चित्त में हुयी हलचल प्रभु प्रेम की लहर हीलौर लेने लगी जब।
रोम – रोम मेरा घिर गया उमंगों से जब बही बहार अंतर से प्रभु प्रेम की।
अवरुध्द कंठों से फूटे प्रेम भरे गीत, जब अहसास हुआ प्रभु प्रेम का।
इक् – इक् करके विभ्रशं हुये प्रभु प्रेम की धारणा, चित्त में जो फूटा प्रेम अंकुर का।
बुध्दि से जन्में अपवादों का नाश हुआ जो पड़ी प्रेम फुहार उनपे।
मस्त होके डूबने – उतरने लगा जब अंतर में आयी बाढ़ प्रभु प्रेम की।
मिट गया मैं जो अंग - अंग से झरने लगा प्रभु प्रेम रस।
खात्मा हो गया रही – सही आत्मा का, जब बहके पहुँचा परमात्मा सागर में।


- डॉ.संतोष सिंह